न्यूज डेस्क/चौपाल Today। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी छवि एक ऐसे वैश्विक नेता के रूप में उभरी है, जो विकास, शांति और सहयोग की बात करता है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अब तक उन्हें दुनिया के 28 देशों द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा, मजबूत कूटनीति और 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक ताकत का प्रतीक है।

भारत की कूटनीति को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता
बीते एक दशक में भारत ने विदेश नीति के मोर्चे पर कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि वह केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण की सोच रखता है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन और दवाओं की आपूर्ति, आपदा के समय मदद, और विकासशील देशों की आवाज़ बनकर खड़ा होना—इन सभी प्रयासों ने भारत को भरोसेमंद साझेदार बनाया। इसी वैश्विक भरोसे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र के देशों से सर्वोच्च सम्मान मिले।
2025: सम्मान की श्रृंखला में नया कीर्तिमान
साल 2025 में प्रधानमंत्री मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया गया। यह सम्मान अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के मजबूत होते संबंधों और विकास सहयोग का प्रतीक है। इसके साथ ही ब्राज़ील, नामीबिया, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, घाना, साइप्रस, श्रीलंका और मॉरीशस जैसे देशों के शीर्ष सम्मानों ने भारत की बहुपक्षीय कूटनीति को नई ऊंचाई दी।
2024: भरोसे और साझेदारी की गहराई
2024 में प्रधानमंत्री मोदी को बारबाडोस, डोमिनिका, नाइजर, ग्रीस और भूटान जैसे देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक अलंकरण प्रदान किए। ये सम्मान लोकतंत्र, सुशासन, क्षेत्रीय स्थिरता और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में भारत की भूमिका को दर्शाते हैं। खासतौर पर कैरेबियन देशों से मिले सम्मान भारतीय प्रवासी समुदाय और ऐतिहासिक रिश्तों की मजबूती का संकेत हैं।

2023: यूरोप से प्रशांत तक भारत की स्वीकार्यता
साल 2023 प्रधानमंत्री मोदी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद खास रहा। फ्रांस ने उन्हें ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया, जो वहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसके अलावा मिस्र का ऑर्डर ऑफ द नाइल, पापुआ न्यू गिनी, फिजी और अन्य देशों के सम्मान यह दिखाते हैं कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।
2020–2019: रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव
अमेरिका द्वारा दिया गया लीजन ऑफ मेरिट, संयुक्त अरब अमीरात का ऑर्डर ऑफ ज़ायद, बहरीन का किंग हमद ऑर्डर ऑफ द रेनैसेंस और मालदीव का सर्वोच्च सम्मान—ये सभी भारत की रणनीतिक साझेदारियों को दर्शाते हैं। मध्य-पूर्व और पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्ते इस दौर में और अधिक प्रगाढ़ हुए।
2018–2016: अंतरराष्ट्रीय पहचान की शुरुआत
फिलिस्तीन का ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन और अफगानिस्तान का स्टेट ऑर्डर ऑफ ग़ाज़ी अमानुल्लाह ख़ान जैसे सम्मान उस समय मिले, जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी सक्रिय भूमिका स्थापित कर रहा था। यह भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक सोच और शांति प्रयासों की पहचान थी।
इन सम्मानों का असली अर्थ
प्रधानमंत्री मोदी को मिले ये सम्मान केवल औपचारिक अलंकरण नहीं हैं। ये दर्शाते हैं कि:
भारत आज वैश्विक समाधान देने वाला देश बन चुका है।
भारतीय नेतृत्व पर दुनिया को भरोसा है।
भारत विकास, तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
भारतीय संस्कृति और मूल्यों को वैश्विक सम्मान मिल रहा है।
हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण
जब दुनिया भारत के प्रधानमंत्री को सम्मानित करती है, तो यह सम्मान हर उस भारतीय तक पहुंचता है जो देश की प्रगति में योगदान दे रहा है। किसान, मजदूर, युवा, वैज्ञानिक, उद्यमी—सभी की मेहनत इस वैश्विक पहचान में शामिल है। यही कारण है कि ये सम्मान “हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण” हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले 28 अंतरराष्ट्रीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत की अविराम और आत्मविश्वासी यात्रा का प्रतीक हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत आज दुनिया में सुना जाता है, माना जाता है और सम्मानित किया जाता है। आने वाले वर्षों में भारत की यह वैश्विक यात्रा और भी मजबूत होगी—और हर भारतीय इसमें गर्व के साथ सहभागी बनेगा।

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