अहमदाबाद (गुजरात): भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक और ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। (ISRO) 24 दिसंबर को अपने हेवी-लिफ्ट रॉकेट के ज़रिये 6.5 टन वज़नी एक कमर्शियल सैटेलाइट का प्रक्षेपण करने जा रहा है। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश स्थित के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण मिशन को लेकर ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC) के निदेशक ने इसे भारत के लिए एक “महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण उपलब्धि” बताया है।

ISRO के लिए क्यों खास है यह लॉन्च?
नीलेश देसाई ने कहा कि 24 दिसंबर को होने वाला यह प्रक्षेपण केवल एक तकनीकी मिशन नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक साख और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाजार में मजबूत उपस्थिति को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा,
“हम 24 दिसंबर को LVM3 के ज़रिये 6.5 टन वज़नी एक कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं। यह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर है।”
यह मिशन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अब तक ISRO ने मुख्य रूप से सरकारी और वैज्ञानिक उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है, जबकि इस बार पूरी तरह कमर्शियल सैटेलाइट को लॉन्च किया जाएगा।
LVM3 रॉकेट की ताकत
LVM3, जिसे पहले Gaganyaan मिशन के लिए तैयार किया गया था, ISRO का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है। यह रॉकेट:
- 8 टन तक का पेलोड लो-अर्थ ऑर्बिट में ले जाने में सक्षम है
- बड़े और भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए डिज़ाइन किया गया है
- भारत को हेवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता वाले देशों की श्रेणी में शामिल करता है
इस मिशन के माध्यम से ISRO यह साबित करेगा कि वह वैश्विक स्तर पर कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम है।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए नई राह
विशेषज्ञों के अनुसार, यह लॉन्च भारत के स्पेस इकोनॉमी के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और देश अपने भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए भारत की ओर रुख कर सकते हैं। ISRO पहले ही PSLV के ज़रिये दर्जनों विदेशी उपग्रह लॉन्च कर चुका है, लेकिन LVM3 के ज़रिये भारी सैटेलाइट लॉन्च करना भारत को एक नए और बड़े बाज़ार में प्रवेश दिलाएगा।
स्पेस एप्लिकेशन सेंटर की भूमिका
अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC), ISRO की एक प्रमुख इकाई है, जो सैटेलाइट आधारित संचार, रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े अनुप्रयोगों पर काम करती है। नीलेश देसाई के अनुसार, इस मिशन से जुड़े कई तकनीकी और डेटा एप्लिकेशन पहलुओं में SAC की अहम भूमिका रही है। इससे भविष्य में संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नेविगेशन सेवाओं को और मज़बूती मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती पहचान
हाल के वर्षों में ISRO ने कम लागत में सफल मिशन पूरे कर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशनों के बाद अब कमर्शियल लॉन्च के क्षेत्र में भी भारत अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
LVM3-M6 मिशन यह संदेश देगा कि भारत न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान में, बल्कि स्पेस बिज़नेस में भी विश्वसनीय भागीदार बन चुका है।
लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में
ISRO सूत्रों के मुताबिक, 24 दिसंबर के प्रस्तावित लॉन्च के लिए सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रॉकेट, सैटेलाइट और ग्राउंड सिस्टम की गहन जांच की जा चुकी है। मौसम और तकनीकी परिस्थितियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है ताकि मिशन पूरी तरह सफल हो सके।
लॉन्च के दिन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन को लेकर लाइव गतिविधियां भी देखने को मिलेंगी।
युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा
यह मिशन भारत के युवाओं और उभरते स्पेस स्टार्टअप्स के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा। सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को स्पेस सेक्टर में बढ़ावा दिए जाने के बाद, ISRO के ऐसे कमर्शियल मिशन नए अवसरों के द्वार खोल सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारत का स्पेस सेक्टर लाखों नौकरियों और अरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
LVM3-M6 मिशन के तहत 24 दिसंबर को होने वाला यह लॉन्च भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। 6.5 टन वज़नी कमर्शियल सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण न केवल ISRO की तकनीकी क्षमता को दर्शाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में एक मजबूत और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
पूरे देश की निगाहें अब 24 दिसंबर पर टिकी हैं, जब ISRO एक बार फिर यह साबित करेगा कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों में भारत का परचम लगातार लहरा रहा है।

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