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कार्बी आंगलोंग भूमि विवाद: मुख्यमंत्री और कार्बी समाज के बीच ऐतिहासिक समझौता; हटेंगे अवैध कब्जे

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गुवाहाटी | 26 दिसंबर, 2025

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा और कार्बी जनजातीय समाज (Karbi tribal society) के प्रतिनिधिमंडल के बीच शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में चल रहे लंबे भूमि विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार और कार्बी समाज अब इस मुद्दे के पूर्ण समाधान के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष संयुक्त रूप से अपना पक्ष रखेंगे।

‘सांकेतिक चित्र’

1. विवाद की पृष्ठभूमि: क्यों सुलग रहा था कार्बी आंगलोंग?

पिछले दो हफ्तों से कार्बी आंगलोंग क्षेत्र तनावपूर्ण स्थिति में था। कार्बी जनजातीय संगठनों के सदस्य विलेज ग्रेजिंग रिजर्व (VGR) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व (PGR) क्षेत्रों से “अवैध अतिक्रमणकारियों” को हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। 22 दिसंबर को यह विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब पुलिस ने अनशनकारियों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की, जिसे भीड़ ने गिरफ्तारी समझ लिया। इसके बाद भीड़ ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य (CEM) तुलिराम रोंगहांग के पुश्तैनी घर में आग लगा दी और कई अन्य स्थानों पर पत्थरबाजी और झड़पें हुईं।

2. बैठक के 5 बड़े और निर्णायक फैसले

गुवाहाटी में हुई इस पहली औपचारिक बैठक को मुख्यमंत्री ने “बेहद उत्कृष्ट” बताया। बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय इस प्रकार हैं:

  • VGR/PGR क्षेत्रों से कार्यालयों की शिफ्टिंग: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जो सरकारी कार्यालय इन आरक्षित चरागाह भूमि पर बने हैं, उन्हें वहां से हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। यह इन क्षेत्रों की पारंपरिक पहचान बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • अवैध व्यापार लाइसेंस रद्द होंगे: पिछले 5 वर्षों के दौरान जो भी व्यापार लाइसेंस नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से जारी किए गए थे, उन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।
  • बेदखली और वनीकरण: बोकोलिया (Bokolia) में सिंचाई विभाग के कार्यालयों सहित अन्य सरकारी भूमियों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ बेदखली (Eviction) अभियान चलाया जाएगा। खाली कराई गई सभी जमीनों की घेराबंदी (Fencing) की जाएगी और वहां सघन वनीकरण अभियान शुरू होगा।
  • न्यायिक समन्वय: मुख्यमंत्री ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) को निर्देश दिया है कि वे उच्च न्यायालय में तत्काल हलफनामा (Affidavit) दायर करें। चूंकि मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए सरकार और परिषद अब संयुक्त रूप से कोर्ट को सूचित करेंगे कि वे इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए तैयार हैं।
  • पीड़ित परिवार को राहत: हालिया हिंसा या विवाद के शिकार हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

3. ‘सतत समाधान’ की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि कूटनीतिक और कानूनी बाधाओं के कारण अब तक कार्रवाई में देरी हो रही थी। उन्होंने कहा, “आज का सबसे बड़ा परिणाम यह है कि हमने उच्च न्यायालय के समक्ष संयुक्त रूप से जाने का फैसला किया है ताकि इस पूरे मुद्दे को तुरंत हल किया जा सके। मुझे पूरी उम्मीद है कि चर्चा की प्रक्रिया के माध्यम से हम सभी समस्याओं का समाधान कर लेंगे।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्र में जनजातीय अधिकारों और कूटनीतिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। कार्बी आंगलोंग का क्षेत्र संविधान की छठी अनुसूची के तहत आता है, जो जनजातीय भूमि के संरक्षण की गारंटी देता है।

4. सुरक्षा और शांति बहाली

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हिंसा वाले क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शांति बनाए रखें। इंटरनेट सेवाएं, जो हिंसा के कारण निलंबित कर दी गई थीं, उन्हें स्थिति सामान्य होने पर धीरे-धीरे बहाल किया जाएगा। सरकार ने सभी समुदायों (कार्बी, बिहारी, नेपाली और अन्य) से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांतिपूर्ण चर्चा का हिस्सा बनें।

5. विश्लेषण: असम की बदलती राजनीति

असम सरकार की यह पहल राज्य में जनजातीय समुदायों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मिशन वसुंधरा के माध्यम से पहले ही हजारों जनजातीय परिवारों को भूमि पट्टे दिए जा चुके हैं। अब कार्बी आंगलोंग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री का ‘ज्वाइंट कोर्ट मूव’ (Joint Court Move) यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में होने वाली बेदखली कानूनी रूप से सुरक्षित रहे और उसे अदालती अवमानना का सामना न करना पड़े।

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