न्यूज डेस्क/चौपाल Today। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कुछ कालखंड ऐसे होते हैं जो आने वाली सदियों की दिशा तय करते हैं। पिछले 25 वर्ष भारत के लिए ऐसे ही रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता और प्रकाशक संजय आर्य के साथ लेखक द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई पुस्तक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” इसी ऐतिहासिक यात्रा का एक प्रामाणिक विश्लेषण है। यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि बदलते भारत की विकासगाथा है।

सत्ता का अर्थ: शासन नहीं, सेवा
इस पुस्तक का मूल दर्शन प्रधानमंत्री मोदी के उस दृष्टिकोण पर आधारित है, जहाँ सत्ता को ‘राज’ नहीं बल्कि ‘सेवा’ का माध्यम माना गया है। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने से लेकर आज वैश्विक नेता के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने तक, मोदी जी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन ने राजनीति की परिभाषा बदल दी है। पुस्तक बताती है कि कैसे उन्होंने “प्रो-पीपल, प्रो-एक्टिव गुड गवर्नेंस” (P2G2) के मॉडल को धरातल पर उतारा।
विकास का ‘गुजरात मॉडल’ और राष्ट्रीय विस्तार
लेखक ने पुस्तक में बहुत बारीकी से दर्शाया है कि कैसे गुजरात में किए गए प्रयोगों—जैसे ‘ज्योतिग्राम योजना’ (24 घंटे बिजली) और ‘वाइब्रेंट गुजरात’—ने देश के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम किया। 2014 के बाद इन्हीं प्रयोगों को ‘सौभाग्य योजना’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी वृहद् योजनाओं के रूप में पूरे देश में लागू किया गया। यह पुस्तक दर्शाती है कि मोदी जी का नेतृत्व ‘इंक्रीमेंटल’ (धीरे-धीरे होने वाला) नहीं बल्कि ‘ट्रांसफॉर्मेशनल’ (पूर्ण परिवर्तनकारी) रहा है।
अंत्योदय: जब योजनाएँ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचीं
इस लेख और पुस्तक का एक प्रमुख हिस्सा ‘कल्याणकारी पहलों’ पर केंद्रित है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ के सपने को सच करते हुए, मोदी सरकार ने तकनीक (JAM ट्रिनिटी – जनधन, आधार, मोबाइल) का उपयोग कर भ्रष्टाचार को समाप्त किया।
- आवास और स्वच्छता: करोड़ों लोगों को पक्के घर और शौचालय प्रदान कर गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया गया।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: ‘आयुष्मान भारत’ के रूप में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का सफल संचालन।
- सुरक्षित भविष्य: उज्ज्वला और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सुदृढ़ विदेश नीति
“रिवोल्यूशनरी राज” पुस्तक भारत की रक्षा नीति में आए बदलावों का भी गहरा विश्लेषण करती है। ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि’ के सिद्धांत पर चलते हुए भारत ने न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित किया, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई। धारा 370 का निष्प्रभावी होना और रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ इसी क्रांतिकारी राज के स्तंभ हैं। वैश्विक मंच पर आज भारत एक ‘संतुलनकारी शक्ति’ (Balancing Power) के रूप में उभरा है, जिसका लोहा पूरी दुनिया मान रही है।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर प्रस्थान
900 शब्दों के इस विस्तृत विश्लेषण का सार यह है कि मोदी जी के पिछले 25 वर्ष भारत के आत्म-सम्मान की पुनर्स्थापना के वर्ष रहे हैं। यह पुस्तक “रिवोल्यूशनरी राज” पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि कैसे एक विजनरी नेतृत्व आपदा को अवसर में बदल सकता है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए शोध का विषय है कि कैसे सुशासन के माध्यम से 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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