तिरुवनंतपुरम, केरल। भारत की वामपंथी राजनीति के प्रमुख स्तंभ के महासचिव ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ की गई कार्रवाई को “नग्न आक्रामकता” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि उन देशों के लिए भी चिंता का विषय है जो गुटनिरपेक्ष आंदोलन और वैश्विक दक्षिण की साझी विरासत में विश्वास रखते हैं।
एम.ए. बेबी ने अपने बयान में कहा कि ने अपने राष्ट्रपति के आदेशों के तहत वेनेजुएला पर जिस तरह की आक्रामक नीति अपनाई है, वह “चौंकाने वाली और पीड़ादायक” है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
वेनेजुएला के साथ भारत के ऐतिहासिक रिश्ते
एम.ए. बेबी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत का मित्र देश रहा है और दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक स्तर पर लंबे समय से सहयोग रहा है। वेनेजुएला न केवल का सक्रिय सदस्य है, बल्कि में भी भारत के साथ संस्थापक नेतृत्व की भूमिका निभा चुका है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में वेनेजुएला के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य या राजनीतिक आक्रामकता केवल उस देश पर हमला नहीं है, बल्कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मूल्यों और बहुपक्षीय सहयोग की भावना पर भी चोट है।
भारत सरकार से ठोस और खुली प्रतिक्रिया की मांग
CPI(M) महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि को इस मुद्दे पर तटस्थता की बजाय खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके अनुसार, भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और गुटनिरपेक्ष परंपरा के वाहक के रूप में वेनेजुएला के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए।
एम.ए. बेबी ने कहा, “भारत हमेशा से संप्रभुता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों का समर्थक रहा है। ऐसे में अमेरिका द्वारा की गई इस कार्रवाई की निंदा करना और वेनेजुएला के समर्थन में खड़ा होना भारत की नैतिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।”
अमेरिका की नीति पर सवाल
उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि एक शक्तिशाली देश द्वारा किसी संप्रभु राष्ट्र पर दबाव बनाना या आक्रामक कदम उठाना वैश्विक असंतुलन को और गहरा करता है। CPI(M) नेता के अनुसार, इस तरह की कार्रवाइयों से विकासशील देशों की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में असमानता बढ़ती है।
एम.ए. बेबी ने यह भी कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही है और किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन वैश्विक विरोध को जन्म दे सकता है।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन और सौर गठबंधन का संदर्भ
अपने बयान में CPI(M) महासचिव ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन उन देशों की आवाज रहा है जो किसी भी महाशक्ति के दबाव में आए बिना स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना चाहते हैं। वेनेजुएला और भारत दोनों ही इस आंदोलन के मूल आदर्शों में विश्वास रखते हैं।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह मंच विकासशील देशों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास का साझा सपना है। ऐसे में गठबंधन के एक संस्थापक देश पर हमला न केवल राजनीतिक बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है।
भारतीय राजनीति में बयान के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CPI(M) का यह बयान केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति को लेकर व्यापक बहस को भी जन्म देता है। वामपंथी दल लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि भारत को अपनी गुटनिरपेक्ष पहचान को और मजबूती से सामने रखना चाहिए।
एम.ए. बेबी का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और भारत की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हैं।
कुल मिलाकर, CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी का यह बयान अमेरिका–वेनेजुएला तनाव पर भारत से स्पष्ट, साहसिक और नैतिक रुख अपनाने की अपील है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को केवल एक दर्शक की भूमिका में नहीं रहना चाहिए, बल्कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन और बहुपक्षीय सहयोग की अपनी परंपरा के अनुरूप वेनेजुएला के साथ खुलकर खड़ा होना चाहिए।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में भारत सरकार इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वह वामपंथी दलों की इस मांग पर कोई ठोस कदम उठाती है।

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