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असम में बीजेपी की चुनावी तैयारी तेज: सीएम हिमंत बिस्वा का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बेदखली अभियान और सीट बंटवारे पर अहम संकेत

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गुवाहाटी | असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने राज्य की राजनीति, आगामी विधानसभा चुनाव, अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई और विपक्षी कांग्रेस पर गंभीर आरोपों को लेकर बड़ा बयान दिया है। सीएम सरमा ने स्पष्ट किया कि असम में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत है और पार्टी समय से पहले अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी राज्यभर में चल रहे वॉल पेंटिंग अभियान को तय समयसीमा के भीतर पूरा कर लेगी। यह अभियान न केवल पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बीजेपी चुनावी मोड में पूरी तरह आ चुकी है।

50 प्रतिशत सीटों पर उम्मीदवार तैयार, तुरंत सूची जारी करने का दावा

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बीजेपी के पास लगभग 50 प्रतिशत विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि पार्टी नेतृत्व निर्देश दे, तो 50 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची उसी दिन शाम तक जारी की जा सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में किसी तरह का आवेदन शुल्क नहीं लेती। न ही पार्टी 25 हजार या 50 हजार रुपये जैसी कोई फीस मांगती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बीजेपी में उम्मीदवारों के नाम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के सुझावों से तय किए जाते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर मजबूत और स्वीकार्य चेहरे सामने आते हैं।

कांग्रेस पर गंभीर आरोप: 3 से 5 करोड़ रुपये तक वसूली का दावा

सीएम सरमा ने विपक्षी Indian National Congress पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारों से 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक की राशि वसूल रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया फिलहाल 22–23 विधानसभा सीटों पर चल रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, कांग्रेस की यह राजनीति केवल धन और सत्ता के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि आम कार्यकर्ता और मतदाता खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट पाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।

तेजपुर में 5000 बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी घोषणा की कि आज तेजपुर में 5000 बीघा अतिक्रमित भूमि पर बड़ा बेदखली अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और यह कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सरकारी और सार्वजनिक भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे अभियानों के माध्यम से राज्य में कानून का राज स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है।

‘मिया’ समुदाय और कांग्रेस पर टिप्पणी

सीएम सरमा ने ‘मिया’ समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समुदाय को कांग्रेस के पक्ष में वोट देने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उनसे भारी रकम लेकर टिकट देती है, लेकिन जब उन्हें किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो पार्टी उनके साथ खड़ी नहीं होती।

उन्होंने कहा कि बीजेपी सभी समुदायों के विकास और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राजनीति में किसी भी वर्ग का शोषण स्वीकार्य नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

असम गण परिषद और अन्य दलों से सीट बंटवारे की बातचीत

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गठबंधन राजनीति को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीजेपी नेता Dilip Saikia असम गण परिषद (AGP) के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत कर रहे हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के मंत्री भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि AGP के साथ सीट शेयरिंग को लेकर फैसला 15 फरवरी तक अंतिम रूप ले लेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बोडोलैंड और राभा क्षेत्रों में भी सहयोगी दलों और स्थानीय संगठनों से बातचीत चल रही है।

बीजेपी की रणनीति और चुनावी संदेश

हिमंत बिस्वा सरमा के बयान से साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी असम में मजबूत संगठन, जल्दी उम्मीदवार चयन और आक्रामक राजनीतिक संदेश के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। वॉल पेंटिंग अभियान, उम्मीदवारों की तत्पर सूची और गठबंधन वार्ता—all यह दर्शाते हैं कि पार्टी किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

वहीं, कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में असम की राजनीति और अधिक तीखी और आरोप–प्रत्यारोप से भरी रहने वाली है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर बीजेपी अपनी संगठनात्मक ताकत और पारदर्शी प्रक्रिया का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

तेजपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, सीट बंटवारे पर तेजी और उम्मीदवार चयन की स्पष्ट रणनीति यह संकेत देती है कि असम में आगामी चुनाव बेहद निर्णायक और दिलचस्प होने वाले हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि विपक्ष इन आरोपों का कैसे जवाब देता है और जनता किस राजनीतिक दृष्टिकोण को स्वीकार करती है।

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