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असम के होजाई में दर्दनाक हादसा: राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आए सात हाथी, वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

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होजाई (असम): असम के होजाई ज़िले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां ट्रेन संख्या 20507 डाउन सैरांग–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से सात हाथियों की मौत हो गई। यह हादसा जामुनामुख–कंपूर रेलवे सेक्शन में हुआ, जो (एन.एफ. रेलवे) के लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत आता है।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई और सभी यात्री सुरक्षित हैं। हालांकि, हाथियों की मौत ने एक बार फिर रेलवे लाइनों से सटे वन क्षेत्रों में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

कैसे हुआ यह हादसा?

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, राजधानी एक्सप्रेस रात के समय अपने निर्धारित मार्ग से तेज़ गति में गुजर रही थी। जामुनामुख–कंपूर सेक्शन घने जंगल और हाथी गलियारों से होकर गुजरता है। इसी दौरान अचानक हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पर आ गया

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, अंधेरा होने और ट्रैक के दोनों ओर घनी वनस्पति होने के कारण लोको पायलट को हाथियों की मौजूदगी का समय पर अंदाज़ा नहीं हो सका। चालक द्वारा आपातकालीन ब्रेक लगाए जाने की कोशिश की गई, लेकिन तेज़ रफ्तार के चलते ट्रेन समय पर नहीं रुक सकी और यह दर्दनाक हादसा हो गया।

मौके पर अफरा-तफरी, सात हाथियों की मौत

टक्कर इतनी भीषण थी कि सात हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और रेलवे के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। ट्रैक के आसपास का इलाका कुछ समय के लिए सील कर दिया गया ताकि राहत और जांच कार्य सुचारु रूप से किया जा सके।

वन विभाग की टीम ने मृत हाथियों की पहचान की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमॉर्टम की तैयारी शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये सभी हाथी एक ही झुंड का हिस्सा थे और संभवतः भोजन या पानी की तलाश में जंगल से निकलकर ट्रैक पार कर रहे थे।

यात्री पूरी तरह सुरक्षित, रेल यातायात प्रभावित

रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस हादसे में राजधानी एक्सप्रेस में सवार किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। यात्रियों को केवल कुछ समय तक असुविधा का सामना करना पड़ा, क्योंकि दुर्घटना के बाद ट्रैक पर रेल यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

हाथियों के शव हटाने और ट्रैक की सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद रेल संचालन को धीरे-धीरे बहाल किया गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

असम में हाथी–ट्रेन टकराव की बढ़ती घटनाएं

असम में रेलवे ट्रैक से हाथियों की टक्कर की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। राज्य के कई हिस्सों में रेलवे लाइनें हाथी कॉरिडोर और वन क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। होजाई, नागांव, काजीरंगा और डिमा हसाओ जैसे इलाकों में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अक्सर रात के समय एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। ऐसे में तेज़ गति से चलने वाली ट्रेनों के कारण हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

वन्यजीव संरक्षण बनाम विकास

इस हादसे के बाद एक बार फिर विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन की बहस तेज़ हो गई है। पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि रेलवे ट्रैक के आसपास पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि:

  • हाथी गलियारों वाले क्षेत्रों में ट्रेनों की गति सीमित की जाए
  • रात के समय विशेष निगरानी बढ़ाई जाए
  • थर्मल कैमरे, सेंसर और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए
  • हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएं

इन उपायों से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

रेलवे और प्रशासन की प्रतिक्रिया

एन.एफ. रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि वे इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। रेलवे पहले से ही कुछ संवेदनशील इलाकों में स्पीड रिस्ट्रिक्शन, चेतावनी संकेत और लोको पायलटों को विशेष निर्देश जारी करता रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, वन विभाग के साथ समन्वय और बेहतर किया जाएगा ताकि हाथियों की गतिविधियों की पहले से जानकारी मिल सके और समय रहते ट्रेनों को नियंत्रित किया जा सके।

स्थानीय लोगों में शोक और नाराज़गी

होजाई और आसपास के इलाकों में इस घटना को लेकर गहरा शोक व्याप्त है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हाथियों की मौत पर दुख जताया है और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथी इस क्षेत्र की जैव विविधता का अहम हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी योजना की आवश्यकता है।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल, असम सरकार, वन विभाग और रेलवे प्रशासन की ओर से संयुक्त जांच के संकेत दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि यदि विकास परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं।

असम के होजाई में हुई यह घटना बेहद हृदयविदारक है। एक ओर जहां राजधानी एक्सप्रेस के सभी यात्री सुरक्षित रहे, वहीं दूसरी ओर सात निर्दोष हाथियों की जान चली गई। यह समय है कि रेलवे, सरकार और वन विभाग मिलकर ऐसे स्थायी समाधान निकालें, जिनसे मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

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