विरुधुनगर, तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद ने राज्य की राजनीति में चल रहे घटनाक्रमों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच संबंधों, पार्टी के अंदरूनी संघर्ष और आगामी चुनावों को लेकर बड़े दावे किए हैं। टैगोर का बयान न केवल विपक्षी दलों के बीच सियासी तनाव को उजागर करता है, बल्कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक धुरी को भी रेखांकित करता है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि बीजेपी की तमिलनाडु इकाई में और के बीच गुटीय संघर्ष अब “हास्यास्पद” स्तर तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार, नेतृत्व और प्रभाव को लेकर चल रही खींचतान से बीजेपी की राज्य इकाई की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। टैगोर ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में जिस भी पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया, उसे राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु की जनता बार-बार यह संकेत दे चुकी है कि वह सांप्रदायिक राजनीति को स्वीकार नहीं करती। इसी संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिनेता-राजनेता भी बीजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे। टैगोर के मुताबिक, राज्य में राजनीतिक विकल्पों की दिशा जनता तय कर रही है, और बीजेपी के साथ जाना चुनावी दृष्टि से घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन ने तमिलनाडु में लगातार चार चुनावों में जीत दर्ज की है। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति में सामाजिक न्याय, संघवाद और समावेशी विकास की जीत बताया। टैगोर ने कहा कि जनता ने बार-बार DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन पर भरोसा जताया है और यह भरोसा आने वाले चुनावों में भी कायम रहेगा।
बीजेपी पर आरोप लगाते हुए टैगोर ने कहा कि पार्टी ने AIADMK को “हथियाने” और कमजोर करने की साजिश रची है। उनके अनुसार, AIADMK अब अस्तित्व के संकट से गुजर रही है और आने वाला चुनाव पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। टैगोर ने यह भी कहा कि AIADMK की मौजूदा हालत इस ओर इशारा करती है कि यह उसका “आखिरी चुनाव” हो सकता है, यदि पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान और जनाधार को पुनर्जीवित नहीं कर पाई।
AIADMK के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए टैगोर ने कहा कि पार्टी के आखिरी महासचिव साबित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को बीजेपी के प्रभाव में ले जाने का श्रेय एडप्पादी पलानीस्वामी को जाता है। टैगोर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “AIADMK” को “अमित शाह AIADMK” में बदलने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है—यह बयान राज्य की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बन गया है।
टैगोर के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ आंदोलन की गहरी जड़ें हैं, जहां क्षेत्रीय अस्मिता और सामाजिक न्याय के मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की राजनीति को थोपने की कोशिशें अक्सर विफल होती रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने बार-बार उन ताकतों को नकारा है जो राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराओं के खिलाफ जाती हैं।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि विपक्षी INDIA गठबंधन तमिलनाडु में मजबूत है और आने वाले चुनावों में भी जनता का समर्थन उसे मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की रणनीति सहयोगी दलों को कमजोर कर अपने नियंत्रण में लाने की रही है, लेकिन तमिलनाडु में यह फार्मूला काम नहीं करेगा। टैगोर के मुताबिक, AIADMK के भीतर चल रहा असंतोष और नेतृत्व संकट इसी रणनीति का परिणाम है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टैगोर के बयान आने वाले महीनों में सियासी बहस को और तेज करेंगे। AIADMK और बीजेपी के रिश्तों, नेतृत्व संघर्ष और गठबंधन राजनीति पर यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राज्य में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं। DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन की लगातार जीतों का हवाला देकर कांग्रेस सांसद ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि तमिलनाडु की जनता स्थिरता और विचारधारा को प्राथमिकता देती है।
कुल मिलाकर, Manickam Tagore का बयान तमिलनाडु की राजनीति में मौजूदा समीकरणों, गठबंधन की मजबूती और विपक्ष की रणनीति को स्पष्ट करता है। यह बयान न केवल बीजेपी और AIADMK के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि INDIA गठबंधन के आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। आने वाले चुनावों में ये मुद्दे किस तरह असर डालेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

Leave a Comment